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छलक रही मेरी तरुणाई

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हम त्राहि -त्राहि मचा दें अगर तू कहे हम धरा को स्वर्ग बना दें  अगर तू कहे  तेरे पास है पूरा मौका  हमसे काम लेने का  क्योंकि छलक रही है तरुणाई  जोश नया उमंग नई  फड़कती भुजाएं  कुछ करना चाहें  भीतर बैठा ज्वालामुखी  विद्रोही है प्रवृत्ति  शेर की दहाड़ मांगती ललकार  लोहा लेने को तैयार है इशारे की दरकरार है  अभी मौका है  अरे नरेश ! क्यों सोता है ? वक़्त न निकाल हाथ से  मर रहे हम प्यास से  तू हमें खोल दे  हिम्मत से बोल दे  रस्ते हम बना लेंगें   सेज़ कांटों की सजा लेंगें  जवान देश भटक न जाए ख़ुद बना फंदा लटक न जाए  कलम ध्यान से चला  उलझी गांठें दे सुलझा  वक़्त हाथ से जाने न दे  झूठे बहाने बनाने न दे  सड़ी-गली आदिम कालीन  का रेड-कॉरपेट बिछा  हमें चलने दे आरक्षण क्यों भक्षण करे  उड़ते बाज़ का ! इससे पहले की  पंख टूटें   नजर करे धोखा  रक्त हो स्थिल  चील नोचें मांस    बनी मेरी लाश का ! तू लेकर मेरी तरुणाई  जागरण क...

यूपी पुलिस की गाड़ी

यूपी पुलिस की गाड़ी है पलट जाने की आदी है गाड़ीजी इतनी काहे जल्दबाजी है लगता योगीजी की रजा में राज़ी है ये जो दिखाती कलाबाजी है चलती अच्छी जालसाजी है यूपी पुलिस की गाड़ी है भैया भर्ती में हैवी ड्राइवर ही आयें जो माहिर गाड़ी बाहुक्म पलटाएं कौन कोर्ट के पचड़े में पड़े! कानून तो बचने की चालबाजी है आती सीधे जन्नत रूट की गाड़ी है यूपी पुलिस की गाड़ी है I

Why is the “r” in Debit?

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  Why is the “r” in Debit?   Six years back when I was teaching Accounting Evolution to the undergraduate students and used debit and credit terms in my explanation, a student just put a puzzling question to me, “why there is an ‘r’ in debit when this r does not exist in debit?”. I was really surprised and clueless as I never read it in books or say I was not smart enough to raise this question to my teacher despite it had struck into my mind in eleventh standard. Then I requested her to give me one day to make sure myself to explain answer for her question in a right way. The answer for this basic question is hidden in the history of evolution of Accountancy. Originally, the terms debit and credit both have Latin roots. The term debit comes from the word debitum, defined as "what is due," and credit comes from creditum, can be described as "something which is to be entrusted to another”. I found in my investigation that there are three or four theories prevailed t...

धरोहर-1

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अगर आप इंटरनेट पर दुनिया की सबसे पुरानी यूनिवर्सिटी सर्च करोगे तो गूगल आपको बोलोना यूनिवर्सिटी को पेश कर देगा जो की आधुनिक अर्थों में विश्व का सबसे पुराना शिक्षण संस्थान है।  लेकिन भारत के समृद्ध इतिहास से अनगिनत धरोहरों को विदेशी और ख़ासकर मुस्लिम आक्रांताओ द्वारा मिटा दिया गया। वजह उनकी ताकत नहीं थी बल्कि हमारे ख़ुद की जागरण की कमी और जयचंदों ने राष्ट्र पर कुठाराघात किया है।  आज हम आपसे बात करेंगे तक्षशिला विश्वविद्यालय की जहां पर शिक्षा की मशाल एक संस्थान के रूप में पहली बार संभाली गई। बात उस समय की है जब गुरुकुल और मठों से शिक्षा का विस्तार हो रहा था। कहते हैं कि भरत के सुपुत्र तक्ष ने तक्षशिला नगरी को बसाया था।  इसी महान नगरी में 600-700 ईसा पूर्व स्थापित किया गया था एक विश्वविद्यालय जिसे इसी नगरी का नाम दिया गया- तक्षशिला। यह एक सीमाओं से रहित एक विस्तृत क्षेत्र था जहां पर महान शिक्षाविद अपने आश्रम बनाते थे जो की सभी के लिए बिना भेदभाव के लिए खुले रहते थे बशर्ते विद्यार्थी गहन अध्ययन के लिए तत्पर हों। यहां के शिक्षक या आचार्य शिक्षा के मर्म को...

भंवर में कश्ती

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रास्ते बहुत नापे हैं मगर मंज़िल अनजानी-सी है लफ़ाजी मुहब्बत की दरिया में क़श्ती अपनी बेगानी-सी है तुफ़ान से बेख़ौफ नाचती  पर सहमी-सी भंवर से क्यों है ? डूब जायेगी या तर जायेगी मुद्दतों की यही कहानी-सी है  चप्पु उल्टे पडें या सीधे इतना हिसाब कहां है अभी बेहोशी में सफर तय करना ऐसी आदत कुछ पुरानी-सी है लाश तो ठिकाने लग जानी है कुछ संभलता हूं जाग कर कहीं तड़फता है कचोटता है चित्त भटकती मधुमक्खी दिवानी-सी है बार-बार सुनाई कहानी-सी है।                              -रामफल

जलसमाधि

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मेरी भी एक कहानी है आ बैठ ! तुम्हें सुनानी है  दिल थाम कर बैठ जा  माँ के आंख का पानी है।  गर्भ में मैं आया था  प्यास ने तड़फाया था माँ भटकी पानी की तलाश में  चली गयी दरिंदो के पाश में।  भूख भी लगी थी  तभी गयी ठगी थी  दिखता अनानास भीतर विस्फोट था जाहिलों के भीतर छिपा खोट था।   बारूद फट गया  जिंदगी से नाता कट गया  बेजुबान मुँह गला लहूलुहान था   इंसान की बाहुदरी का बखान था।   माँ ने किसी को नहीं मारा  उसने तो खुदा को पुकारा  तेरे इंसान ने ज़कात में क्या दिया !   मेरी मौत का तमाशा बना दिया।   माँ रोती रही  बेसुध होती रही  मैं भी भीतर तड़फता रहा  माँ की मासूमियत से लड़ता रहा।  वेलियार की शरण पा कर   आग सीने की बुझा कर मुझसे मांगते ही बेवज़ह माफ़ी  इंसानियत और माँ ने ले ली जलसमाधि।                      

अब बता जिएं तो कैसे जिएं !

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तू बीच अधर में छोड़ गयी सुना फैसला कलम तोड़ गयी प्रिये !  सांस सांस तेरी याद में  लेना मुश्किल हो रहा है  उम्र के इस पड़ाव पर  आंसू छलकाना मुश्किल हो रहा है  अधपका प्रेमफल तोड़ गयी   तू बीच अधर में छोड़ गयी, प्रिये ! अब बता जिएं तो कैसे जिएं ! तेरे साथ की  कश्ती में  जवानी का भंवर गुजर गया  शांत किनारे पर बैठने की आश में  सफर अच्छा गुजर गया !  अब तो निर्मोह प्यास थी  खिलते कमल की सुवास थी  प्रिये प्रेममहल पल में उजड़ गया  तू जबसे मुख मोड़ गयी   जीवन कलश तोड़ गयी    तू बीच अधर में छोड़ गयी, प्रिये   अब बता जिएं तो कैसे जिएं ! मेरी वेदना किसे सुनाऊं  'सुनो भी' कहकर किसे बुलाऊं  किसी सूरत में तेरी मूरत पाऊं  फुदकती चिड़िया को कैसे समझाऊं !  उच्छृंखल हुआ तो जग उलाहना देगा  सफ़ेद दाढ़ी की दुहाई देगा  पहन बेड़ियां तेरी तलाश कर रहा हूं  लाश हूं पर सांस भर रहा हूं    तू जीवन डोर क्यों तोड़ गयी प्रिये तू बीच अधर में छोड़ गयी, प्रिये ...