अब बता जिएं तो कैसे जिएं !
तू बीच अधर में छोड़ गयी


सुना फैसला कलम तोड़ गयी प्रिये !
सांस सांस तेरी याद में
लेना मुश्किल हो रहा है
उम्र के इस पड़ाव पर
आंसू छलकाना मुश्किल हो रहा है
अधपका प्रेमफल तोड़ गयी
तू बीच अधर में छोड़ गयी, प्रिये !
अब बता जिएं तो कैसे जिएं !
तेरे साथ की कश्ती में
जवानी का भंवर गुजर गया
शांत किनारे पर बैठने की आश में
सफर अच्छा गुजर गया !
अब तो निर्मोह प्यास थी
खिलते कमल की सुवास थी
प्रिये प्रेममहल पल में उजड़ गया
तू जबसे मुख मोड़ गयी
जीवन कलश तोड़ गयी
तू बीच अधर में छोड़ गयी, प्रिये
अब बता जिएं तो कैसे जिएं !

मेरी वेदना किसे सुनाऊं
'सुनो भी' कहकर किसे बुलाऊं
किसी सूरत में तेरी मूरत पाऊं
फुदकती चिड़िया को कैसे समझाऊं !
उच्छृंखल हुआ तो जग उलाहना देगा
सफ़ेद दाढ़ी की दुहाई देगा
पहन बेड़ियां तेरी तलाश कर रहा हूं
लाश हूं पर सांस भर रहा हूं
तू जीवन डोर क्यों तोड़ गयी प्रिये
तू बीच अधर में छोड़ गयी, प्रिये
अब बता जिएं तो कैसे जिएं !

तेरे साथ जो सरपट दौड़ती
ठहरी है सहमे सन्नाटे से
नए आयाम कभी खोलती
न जागती मृदङ्ग पे पड़े झन्नाटे से
जिंदगी बाणों की शया पर दम तोड़ती
पतझड़-बियावान में तुझे ही याद करती है
अग्नि समक्ष दिए वचन याद करती है
और जलता रहता हूं ख़ाक बनता रहता हूं
तू क्यों वामांग वचन तोड़ गयी प्रिये
तू बीच अधर में छोड़ गयी, प्रिये
अब बता जिएं तो कैसे जिएं !
-रामफल
Nice
ReplyDeletethanku ji
DeleteNice big brother
ReplyDeletethanks little brother
DeleteYou nailed it sir
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