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Showing posts from August, 2020

धरोहर-1

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अगर आप इंटरनेट पर दुनिया की सबसे पुरानी यूनिवर्सिटी सर्च करोगे तो गूगल आपको बोलोना यूनिवर्सिटी को पेश कर देगा जो की आधुनिक अर्थों में विश्व का सबसे पुराना शिक्षण संस्थान है।  लेकिन भारत के समृद्ध इतिहास से अनगिनत धरोहरों को विदेशी और ख़ासकर मुस्लिम आक्रांताओ द्वारा मिटा दिया गया। वजह उनकी ताकत नहीं थी बल्कि हमारे ख़ुद की जागरण की कमी और जयचंदों ने राष्ट्र पर कुठाराघात किया है।  आज हम आपसे बात करेंगे तक्षशिला विश्वविद्यालय की जहां पर शिक्षा की मशाल एक संस्थान के रूप में पहली बार संभाली गई। बात उस समय की है जब गुरुकुल और मठों से शिक्षा का विस्तार हो रहा था। कहते हैं कि भरत के सुपुत्र तक्ष ने तक्षशिला नगरी को बसाया था।  इसी महान नगरी में 600-700 ईसा पूर्व स्थापित किया गया था एक विश्वविद्यालय जिसे इसी नगरी का नाम दिया गया- तक्षशिला। यह एक सीमाओं से रहित एक विस्तृत क्षेत्र था जहां पर महान शिक्षाविद अपने आश्रम बनाते थे जो की सभी के लिए बिना भेदभाव के लिए खुले रहते थे बशर्ते विद्यार्थी गहन अध्ययन के लिए तत्पर हों। यहां के शिक्षक या आचार्य शिक्षा के मर्म को...

भंवर में कश्ती

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रास्ते बहुत नापे हैं मगर मंज़िल अनजानी-सी है लफ़ाजी मुहब्बत की दरिया में क़श्ती अपनी बेगानी-सी है तुफ़ान से बेख़ौफ नाचती  पर सहमी-सी भंवर से क्यों है ? डूब जायेगी या तर जायेगी मुद्दतों की यही कहानी-सी है  चप्पु उल्टे पडें या सीधे इतना हिसाब कहां है अभी बेहोशी में सफर तय करना ऐसी आदत कुछ पुरानी-सी है लाश तो ठिकाने लग जानी है कुछ संभलता हूं जाग कर कहीं तड़फता है कचोटता है चित्त भटकती मधुमक्खी दिवानी-सी है बार-बार सुनाई कहानी-सी है।                              -रामफल

जलसमाधि

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मेरी भी एक कहानी है आ बैठ ! तुम्हें सुनानी है  दिल थाम कर बैठ जा  माँ के आंख का पानी है।  गर्भ में मैं आया था  प्यास ने तड़फाया था माँ भटकी पानी की तलाश में  चली गयी दरिंदो के पाश में।  भूख भी लगी थी  तभी गयी ठगी थी  दिखता अनानास भीतर विस्फोट था जाहिलों के भीतर छिपा खोट था।   बारूद फट गया  जिंदगी से नाता कट गया  बेजुबान मुँह गला लहूलुहान था   इंसान की बाहुदरी का बखान था।   माँ ने किसी को नहीं मारा  उसने तो खुदा को पुकारा  तेरे इंसान ने ज़कात में क्या दिया !   मेरी मौत का तमाशा बना दिया।   माँ रोती रही  बेसुध होती रही  मैं भी भीतर तड़फता रहा  माँ की मासूमियत से लड़ता रहा।  वेलियार की शरण पा कर   आग सीने की बुझा कर मुझसे मांगते ही बेवज़ह माफ़ी  इंसानियत और माँ ने ले ली जलसमाधि।