जलसमाधि

मेरी भी एक कहानी है
आ बैठ ! तुम्हें सुनानी है 
दिल थाम कर बैठ जा 
माँ के आंख का पानी है। 

गर्भ में मैं आया था 
प्यास ने तड़फाया था
माँ भटकी पानी की तलाश में 
चली गयी दरिंदो के पाश में। 

भूख भी लगी थी 
तभी गयी ठगी थी 
दिखता अनानास भीतर विस्फोट था
जाहिलों के भीतर छिपा खोट था।  

बारूद फट गया 
जिंदगी से नाता कट गया 
बेजुबान मुँह गला लहूलुहान था  
इंसान की बाहुदरी का बखान था।
केरल में क्रूरता की बलि चढ़ी गर्भिणी ... 

माँ ने किसी को नहीं मारा 
उसने तो खुदा को पुकारा 
तेरे इंसान ने ज़कात में क्या दिया !  
मेरी मौत का तमाशा बना दिया।  

माँ रोती रही 
बेसुध होती रही 
मैं भी भीतर तड़फता रहा 
माँ की मासूमियत से लड़ता रहा। 
kerala elephant incident: भूूखी गर्भवती हथिनी ...

वेलियार की शरण पा कर  
आग सीने की बुझा कर
मुझसे मांगते ही बेवज़ह माफ़ी 
इंसानियत और माँ ने ले ली जलसमाधि।      
  

  
 


  
  
 

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