जलसमाधि
मेरी भी एक कहानी है

आ बैठ ! तुम्हें सुनानी है
दिल थाम कर बैठ जा
माँ के आंख का पानी है।
गर्भ में मैं आया था
प्यास ने तड़फाया था
माँ भटकी पानी की तलाश में
चली गयी दरिंदो के पाश में।
भूख भी लगी थी
तभी गयी ठगी थी
दिखता अनानास भीतर विस्फोट था
जाहिलों के भीतर छिपा खोट था।
बारूद फट गया
जिंदगी से नाता कट गया
बेजुबान मुँह गला लहूलुहान था
इंसान की बाहुदरी का बखान था।
माँ ने किसी को नहीं मारा
उसने तो खुदा को पुकारा
तेरे इंसान ने ज़कात में क्या दिया !
मेरी मौत का तमाशा बना दिया।
माँ रोती रही
बेसुध होती रही
मैं भी भीतर तड़फता रहा
माँ की मासूमियत से लड़ता रहा।
वेलियार की शरण पा कर
आग सीने की बुझा कर
मुझसे मांगते ही बेवज़ह माफ़ी
इंसानियत और माँ ने ले ली जलसमाधि।
Heart touching
ReplyDeletethanku ji
DeleteTruly said nice lines
ReplyDeletethanks ji
DeleteAbsolutely mind blowing sir
ReplyDeletethanku ji
Delete😰true and heart touching line..
ReplyDeleteThanku ji
Deletenice poem sir..
ReplyDeleteShukriya ji
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