विद्या की रेखा
विद्या की रेखा आज मैं एक अद्भुत कहानी लेकर आया हूँ जो की आपको भीतर से झकझोर देगी। ये कहानी हमारे संस्कृत के टीचर ने दसवीं क्लास में सुनाई थी, हुआ ये था की पढ़ते हुए किसी श्लोक पर भाग्य के बारे में स्टूडेंट्स की डिस्कशन डिबेट में बदल गयी थी। श्री महावीर जी संस्कृत के जाने माने टीचर थे, उन्होंने हमारी डिबेट को बीच में रोककर बोलना शुरू किया, "किसी के लिए भाग्य मायने रख सकता है पर कुछ इसे बना लेते हैं।" हमने एक साथ पूछा, "कैसे सरजी ?" "एक बालक था नाम था पाणिनि। पढ़ने में इतना कमजोर की हर टीचर से डांट पड़ती पर कुछ भी सुधार न होता था, टीचर्स ने पीट कर भी जोर लगा लिया मगर उसे कुछ याद न होता।" श्रीमान जी बड़ी शिद्दत से कहानी सुनाने लगे थे। टीचर्स ने तंग होकर उसे गुरुकल से जाने को कह दिया था उसे। घर आकर अपने पिताश्री पाणिन जी को सब बताया तो वो बड़े दु:खी हुए क्योंकि पाणिन जी खुद भी एक विख्यात विद्वान् पंडित थे। एक मंदबुद्धि बेटे को पाकर वो भीतर ही भीतर घुट रहे थे। कुछ दिन बाद पाणिन जी के पास उनके बचपन के मित्र का आना हुआ जिनका ज्योतिष और शास्त्रार्थ में कोई...