कोरोना तो बेक़सूर है-1

कोरोना तो बेक़सूर है
बना या बनाया गया है !

भागा या भगाया गया है !
ना जाने किसने खेल रचाया है !!
कहर है कुदरत का या साज़िश है ?
जबाव सब मनमाफ़िक हैं
साज़िश से हम ना निपट पायेंगे
कहर कुदरत का तो मंज़ूर है
हां जनाब घर में रहना जी हजूर है
कोरोना तो बेक़सूर है।

चीन- अमेरिका सब मिले हैं
टेड्रोस के होंठ सिले हैं
बंद आँखों वाले गले मिले हैं
इटली का हाल बेहाल है
खुली थीं सरहदें अब पूरा संसार बंदी है
स्पेन ब्रिटेन सब जगह मंदी है
मासूम जानों का यही सवाल है
हमारा क्या कसूर है ?
कोरोना तो बेक़सूर है।

मेरे वतन के यहां यही सिलसिले हैं
हमें तो अपनों से ही गीले हैं
मजदूरों की बेबसी- फ्री का  झांसा है
ज़मात ने फ़ोकट में मौत को बांटा है
किसी ने थूका किसी ने खाँसा है
डॉक्टरों को पीटा पुलिस का हाथ काटा है
जो जान बचा रहे उन्हीं के दुश्मन बन रहे हैं
उफ़! इन लोगों का ये दस्तूर है !
कोरोना तो बेक़सूर है।
Woman in Black Leather Jacket Wearing White Mask

कोरोना ने पहना क्राउन है
बा-हुक्म हर गली लॉक डाउन है
फुदकते शहरों में सन्नाटा है
भूूूखे पेट कोई थाली बजाता है
देखो झोंपड़ी में कौन दीया जलाता है !
मौत पर भी व्यापार हुआ है
सौ का सौदा हजार हुआ है
कोई भूख से तड़पा है
गरीब बन किसीने उसका खाना हड़पा है
इंसान ही इंसान का नासूर है !
कोरोना तो बेकसूर है।  

                        -रामफल










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