Together We Can Win
जब मैं ये ब्लॉग लिख रहा हूँ तब तक भारत में कोरोना वायरस से पीड़ित लोगों का आंकड़ा 500 को छू गया होगा। जो की बड़ा चिंता का विषय है। 14 मार्च 2020 को ब्रिटिश इकोनॉमिस्ट जिम ओ'नील का एक कंट्रोवर्सिअल बयान आया था, उन्होंने कहा मैं धन्यवाद करता हूँ कि कोरोना चीन में फैला न कि भारत जैसे देश में। भारत के पास मेडिकल फैसिलिटीज़ तुलनात्मक रूप से कम हैं , उनका कथन इस सन्दर्भ में तो ठीक हो सकता है लेकिन अगर वो ये किसी पूर्वाग्रह के चलते व्यंग्यात्मक तरीके से बोल रहे हैं तो वो सरासर गलत हैं। और उनके गलत होने के पीछे बहुत महत्वपूर्ण कारण है -भारतीय लोगों का रहन-सहन, खान-पान या यूँ कह ले भारतीय संस्कार। हो सकता है मैं जो अब कहूं वो कुछ लोगों को पसंद ना आए। भारतवर्ष की सरजमीं पर जितने भी धर्म पैदा हुए सब का मूल भाव एक है। वो मनुष्यों के साथ सभी प्राणिमात्र एवं प्रकृति का आदर सत्कार करते हैं। सभी मुक्ति की बात करते हैं और अहिंसा से रहना उनके रक्त का हिस्सा है। लेकिन वो जहां भी जुलम हो उसको मिटने के लिए वैरभाव रहित हिंसा को सही मानते हैं। शायद इसी वजह से यहाँ जानवरों को खाने के रूप में नहीं देखा जाता- जो कि इस वायरस के फैलने की बड़ी वजह मानी जाती है। ये मेरी समझ भारतीय संस्कृति को परखने के बाद बनी है। भारत में हाथ जोड़कर नमस्कार करने का प्रचलन है, जो की पूरी दुनिया में अभिवादन का तरीका बन चूका है। देश के ज्यादातर हिस्सों में जूते चप्पल निकलकर और हाथ-पैर धोकर घर में प्रवेश किया जाता है। जिसकी अब सख्त जरूरत है। मेरी माँ ने मुझे सिखाया की काम से घर आते ही सबसे पहले हाथ धोकर फिर किसी से बात करनी है। यहाँ जन्म से लेकर दाह-संस्कार तक वैज्ञानिक संस्कार हैं। दुनिया अब तांबे के बर्तनों से लेकर भारतीय मसालों को प्रयोग करने पर ज़ोर दे रही है। चीन में इस वायरस के बाद मृत शरीरों को दाह संस्कार करने का निर्देश दे दिया ताकि ये वायरस और न फैले। भारतीय लोगों के यज्ञ अनुष्ठान अब केवल अन्धविश्वास नहीं रहे। भारतीय सभ्यता कोई मजाक नहीं बल्कि अनुभूत प्रयोगों से पनपे मूल्यों -प्रचलनों का बेजोड़ संगम है। जिम के विपरीत वर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाईजेशन के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर डॉ. मिचेल जे रेयान ने भारत के ऊपर भरोसा जताया है। वो कहते हैं कि भारत ने इससे भी पहले स्माल पॉक्स और पोलियो को भी पूर्णतया उन्मूलन किया है, भारत के पास बहुत सारी योग्यता है उन्हें तेजी से इस वायरस से उभरना होगा। सच में हम मिलकर दुनिया को दिखा सकते है कि हमारे पास अपरिमित संभावनाएं हैं। हमें सबकी सुखी रहने की सिर्फ कामनाएं तक सिमित न रहते हुए उस पर काम भी करना होगा।
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